अमरूद से आम पर जा रही है गिलहरी
आते-जाते गा रही है गिलहरी
इस किचकिच को संगीत हाँ कह सकते हैं
भाव है इसमें भावना है भय है चिंता है स्नेह है लय है !
हिंदी समय में भवानीप्रसाद मिश्र की रचनाएँ